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शाही महल - प्रेम और मृत्यु का साक्षी

दिशा
श्रेणी ऐतिहासिक

ताप्ती के मुख्य तट पर निवत शाही महल सिर्फ मुगल साम्राज्य के उत्थान और पतन का ही साक्षी नहीं है, बल्कि इसने मोहब्बत की मिसाल कहे जाने वाले मुमताज और शाहजहाँ के प्रेम को भी बड़े करीब से देखा है। फारूकी काल में बना, दो भागों में विभाजित यह महल ही चार एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। कहा जाता है कि इस किले का एक हिस्सा राजकीय कार्यों के लिए था, तो दूसरे हिस्से का उपयोग शाही निवास अर्थात् हरम के रूप में किया जाता था। सात मंज़िला महल की सुन्दरता और कल-कल समीप बहती ताप्ती के प्रवाह से यह निर्मित होता हुआ अद्वितीय था।

वहीं वजह थी कि दक्षिण का सूबेदार बनाकर बुरहानपुर भेजे गए शाहजहाँ ने इस महल को ही राजसत्ता का केंद्र बनाया। इस महल में ही दीवान-ए-आम और दीवान-ए-ख़ास लगता था। शाहजहाँ के बाद औरंगज़ेब और उसके बाद हुए मोहम्मद शुजा तथा आलमगीर का निवास स्थान भी यह बना। सत्ता केंद्र के साथ ही यह महल प्रेम और उसके दुखद अंत का भी गवाह रहा है।

जहाँ इस महल की छत शाहजहाँ और मुमताज का मिलन स्थल थी, तो वहीं तीसरी मंज़िल पर बने महल में अपनी चौदहवीं संतान को जन्म देने के बाद मुमताज ने शाहजहाँ की गोद में अपनी ज़िन्दगी की अंतिम साँस ली। मुमताज की मौत के बाद शाहजहाँ ने इसी महल में अपने आपको क़ैद कर लिया था। कहते हैं कि यह महल आज भी मुमताज और शाहजहाँ के प्रेम और विछोह की दास्तान सुना रहा है।

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  • शाही किला
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कैसे पहुंचें:

हवाई मार्ग द्वारा

फ्लाइट द्वारा बुरहानपुर पहुँचने के लिए, निकटतम हवाई अड्डा इंदौर शहर में है, जो 190 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर हवाई अड्डे की भारत के अन्य प्रमुख शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, रायपुर, नागपुर आदि के साथ अच्छी उड़ान कनेक्टिविटी है।

ट्रेन द्वारा

बुरहानपुर शहर, मुंबई-दिल्ली केंद्रीय रेल मार्ग पर स्थित है। इस गंतव्य के लिए कई सुपर-फास्ट, एक्सप्रेस ट्रेनें हैं। बुरहानपुर का मुंबई, दिल्ली, आगरा, वाराणसी, ग्वालियर, कटनी, जबलपुर, पिपरिया, झाँसी, भोपाल जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों और शहरों से सीधा रेल संपर्क है।

सड़क के द्वारा

महाराष्ट्र राज्य की सीमा के करीब होने के कारण, भुसावल, जलगाँव, औरंगाबाद आदि के लिए बहुत अच्छा सडक मार्ग है। बुरहानपुर से भोपाल के मध्य दूरी व्हाया इंदौर 375 किमी है एवं व्हाया मुंदी 331 किमी है |